Sunday, 30 June 2013

मेरा छद्म नकारापन

मैं जहाँ तक सोच समझ पाया हूँ, वो अपने विचार आप सभी भाई बहनों के साथ साझा कर रहा हूँ। और आप सबसे अपने विचार के बारे में जानना चाहता हूँ। मैने विचार करके देखा तो पाया,कि मैं अपना ज्यादा वक्त इस विचार में जाया करता हूँ,कि अमुक व्यक्ति ने ये नहीं किया, वो नहीं किया।या उसे ऐसा नहीं करना चाहिए, या वैसा करना चाहिए। जबकि दूसरे का कर्तव्य उसके करने पर निर्भर करता है,वो मेरे वश में नहीं है।मेरे वश में सिर्फ वही है जो में करना चाहू, मगर मैं मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं, उसपर विचार बहुत ही कम समय करता हूँ। अतः परोक्ष रूप से मेरा अधिक समय जो में नहीं कर सकता उसमे जाया करता हूँ, और जो में करसकता हूँ, उसमे बहुत कम समय देता हूँ। अर्थात सब जानते हुए भी,उसीमें समय बर्वाद करना,जो में नहीं कर सकता।क्या मेरा छद्म नकारापन नहीं है? कृपया हाँ या ना में जबाब देने का कष्ट जरूर करियेगा। प्रतीक्षा में ..............  
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