Sunday, 4 March 2012

निवेदन

अपने भारत को तो भारत ही रहने दीजिये.
मेरा करवद्ध निवेदन है,इतनी कृपा तो कीजिये.
शिक्षा आप कोई भी पाओ,
 जिय में आये वंहा तक जाओ,
फोन और तुम नेट चलाओ,
कम्प्यूटर को सरल बनाओ,
हर तकनीक को सीखो समझो,
भाषाएं कितनी भी सीखो.
पर मात्-भाषा को ना भूलने का, वचन तो दीजिये.
अपने भारत को तो भारत ही रहने दीजिये.
मेरा करवद्ध निवेदन है, इतनी कृपा तो कीजिये.
जीव विज्ञानं हो या भौतिकी,
या हो रसायनशास्त्र,
अभियांत्रिकी हो या व्यवस्थापन,
या हो वनस्पतिशास्त्र.
कम्प्यूटर शिक्षा हो,
या हो खगोल विज्ञानं,
 इनके अध्ययन से तो,
मिलता ही है ज्ञान.
कोई विषय,विज्ञानं,
शास्त्र या हो तकनीकी शिक्षा,
नहीं है दुश्मन किसी रूप में,
इनकी नैतिक शिक्षा
हर ज्ञान आप जितना चाहें, उतना लीजिये,
 पर नैतिक शिक्षा को तो, जीवित रहने दीजिये.
अपने भारत को तो भारत ही रहने दीजिये.
मेरा करवद्ध निवेदन है,इतनी कृपा तो कीजिये.
एकाकी जीवन हो या हो शामिल परिवार,
पर समाज है मानव जीवन का मूलाधार,
मन में आये वैसे रहिये,
संबोधन में कुछ भी कहिये.
पर रिश्तों की मर्यादा तो,बनी ही रहने दीजिये।
अपने भारत को तो,भारत ही रहने दीजिये.
मेरा करवद्ध निवेदन है,इतनी कृपा तो कीजिये. 
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